तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर
5 देवों का
संगम
एक अद्वितीय और भव्य मंदिर का निर्माण होने जा रहा है। यह मंदिर उन भक्तों के लिए एक दिव्य आस्था स्थल होगा, जो आध्यात्मिक शक्ति, संतुलन और आत्मज्ञान की खोज में हैं। मंदिर परिसर को इस प्रकार से निर्मित किया जाएगा कि वहाँ ध्यान और प्रार्थना आयोजनों के लिए एक शांत और प्रेरणादायक वातावरण मिले।
प्रेम कुटीर
स्नेह और प्रेम से ओत-प्रोत
प्रेम कुटीर, जिसका शाब्दिक अर्थ ही स्नेहल भावना का अहसास कराता है, ऐसा संकुल तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर में बनाया जाएगा। यहाँ हमारे धर्म समाज के बड़े बुजुर्गों के लिए समय-समय पर उनके परिजनों की आवश्यकता अनुसार अल्पकालीन आवास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जहाँ रहने, खाने और चिकित्सकीय देखभाल की व्यवस्था होगी। ऐसी संकल्पना के साथ प्रेम कुटीर का निर्माण सुसज्जित आवास के साथ किया जाएगा, जहाँ भागवत भाव का आभास होगा।
तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर
हमारी परिकल्पना - एक अलौकिक सनातन विश्वविद्यालय स्वरूप केंद्र
हमारी परिकल्पना
तीर्थधाम : पंचदेव मंदिर एवं प्रेम कुटीर का निर्माण हमारे क्षेत्र के सनातन धर्म प्रेमियों, उद्योगपतियों एवं गौसेवक श्री सूर्य प्रकाश जी अग्रवाल एवं उनके साथियों की संकल्पना से प्रारंभ हुआ। कौशल्या देवी अग्रवाल चैरिटेबल ट्रस्ट ने लगभग रुपए 5 करोड़ मूल्य की भूमि दान कर इस पावन योजना का शुभारंभ किया।
गौसेवा और भक्ति का संगम
मंदिर परिसर में एक भव्य गौशाला का निर्माण किया जाएगा। यहाँ गौसेवा के साथ-साथ गाय का दूध एवं उससे निर्मित सामग्री का उपयोग केवल मंदिर के धार्मिक कार्यों में ही होगा।
हमारा उद्देश्य
यह मंदिर केवल पंचदेव भगवान की आस्था का केंद्र ही नहीं होगा, बल्कि दक्षिण गुजरात, वापी, दमन और सिलवासा क्षेत्र में सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को जीवंत रखने वाला एक अलौकिक सनातन विश्वविद्यालय स्वरूप केंद्र बनेगा।
निवास सुविधाएँ
प्रारंभिक चरण में 10 सुसज्जित कक्ष, साधु-संतों एवं धर्मप्रेमियों के निवास हेतु
प्रेम कुटीर
80 सुसज्जित कक्ष वरिष्ठ परिजनों के लिए आपातकालीन अवकाश गृह की व्यवस्था।
सेवा व्यवस्था
सात्विक भोजन, चिकित्सा और देखभाल की समुचित व्यवस्था (व्यावसायिक उपयोग पूर्णतः वर्जित)
आपकी सहभागिता
मंदिर निर्माण हेतु लगभग 4 लाख ईंटों की आवश्यकता है
हर सनातन प्रेमी इस पावन कार्य में अपनी आस्था की ईंट जोड़कर योगदान दे सकता है।
भविष्य की दिशा
यह केवल एक संक्षिप्त परिकल्पना है। पंचदेव के आशीर्वाद स्वरूप इस तीर्थ धाम में आगे अनेक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों का निरंतर विस्तार होता रहेगा।